कहा प्रभु ने

अवतार मेरा तभी होगा
जब आ जायेंगे हनुमान।
ब्रहा्रचर्य का व्रत लिये
जो हर नारी को मॉं समझे
मधुर गायक का प्रिय मित्र हो
प्रभु को ले क्षण में पहचान
भक्ति का जो रचे न स्वांग
जा के ह्दय हों श्री राम।
हनुमान बिना हैं राम कहॉं?
है भक्त बिना भगवान कहॉं?
सोने की जिसमें लालच ना हो
अभी ऐसा कोई इंसान कहॉं?
जब-जब मैं धरती पर आया
रंग रूप सब बदल गये
बदल गया मेरा परिधान
कभी बराह तो कभी मतस्य
कभी तंबूराधारी नारदवंषीवादक मै घनष्याम
कभी फरसा लिए हाथ में
फारसाधारी मैं परषुराम।
अगर पुनः धरती पर आऊॅं
कैसे मुझको पहचानोंगे?
ना पीठ पर तरकष होगा
ना मेरे कर में हो वाण
फूलपैंट और बुषर्ट पहने
निष दिन खोजूं गलियो में
जो मुझको हनुमान मिले
जग को मिल जाये श्री राम।

Writer from Bihar – Kashinath Sharma, Khagaul-Patna

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