जमीं पर आया बहार

सुर्ख गुलदरख्ते से कोमल
किसी हसीना के तवस्सुम के निषॉं
गुसल के बाद चली कपड़े बदलने को
टहनियों से तोड़कर रिष्ते पीपल अपने जर्द पत्ते को
यह देख हम सफर हो गये उसके
शीषम के स्याह पत्ते
सफेद फूलों का सेहरा बॉंधे
खड़ा नाजुक सहजन
थी कोयल न मीठी सी सदा
आ गया तेरा साजन
खत्तम हुआ तेरा इंतजार
बॉंट ले आपस में प्यार
होली का हुड़दंग लें
जमीं पर आया बहार।।

Writer from Bihar – Kashinath Sharma, Khagaul-Patna

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