मैं ‘पागल’ हूँ

मैं ‘पागल’ हूँ
ये मैं नहीं लोग कहते हैं.
उस समय…!!

जब हँसता हूँ, कहकहे लगाकर
की खिल गयी हो फुलवारी के सारे फूल
और जब रोता हूँ,फुट-फुट कर
की छलनी हो जाये धरती का कलेजा
उस समय लोग कहते हैं…!!

जब मैं चीखता हूँ,पुरे मन से
की गूंजा दूंगा अपने शंखनाद को चहुँ और
और जब मैं चुप होता हूँ ,
की थम गयी हो सांसो के संग धरा सारी
उस समय लोग कहते हैं…!!

जब मैं दोड़ता हूँ,पुरे वेग से
की जीत लूँगा जिन्दगी की हर रेस
और जब थक कर बैठ जाता हूँ,
की जैसे ख़तम हो गयी हो जीने की ईक्षा
उस समय लोग कहते हैं…!!

गर गाना-गुनगुनाना,हसना-मुस्कुराना,
चीखना-चिल्लाना,रूठना मानना
पागलपन हैं, तो मैं हूँ.
जो लोग कहते हैं…!!

Writer from Bihar – सुनील कुमार झा

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