Bihar CM leads Political Conclave to end newborn deaths with Save the Children

CM of Bihar Shri Jitan Ram Manjhi Addressing No Child Born to Die an event by Save the Children Group in Patna

Taking a Pledge for No Child Born to Die Event at Hotel Panache Patna on 20th July 2014

Patna, 20 July. Save the Children hosted a political conclave – on the theme ‘No Child Born to Die’ — with elected representatives and political leaders from Bihar in the state capital today. The state leadership present at the event included Shri Jitan Ram Manjhi, Honorable Chief Minister, as the Chief Guest, Shri Ramdhani Singh, Honorable Health Minister, as the special invitee and Members of Parliament, Members of Legislative Assembly and Members of Legislative Council from across political parties. This included participation of Shri Ashwani Kumar Choubey, Former Health Minister, Bihar; Shri Ram Kirapal Yadav, MP; Shri Naval Kishore, MLC; Shri Prem Ranjan, MLA and Shri Ajay Yadav, MLA. The chief minister highlighted the importance of tackling newborn deaths in the effort to improve child survival in the state. The political leadership actively engaged in the dialogue to end preventable deaths and each individual took the pledge for stepping up efforts in delivering the health services to every newborn and child in the state. “The state has initiated various programmes to address the issue of child survival,” Manjhi claimed, and stressed the need to focus on the girl child, right from issues related to female foeticide to ensuring an equal opportunity for girls in the society. The chief minister read out a pledge for the audience, with which everyone present committed to make efforts for reducing newborn and child mortality. The health minister added that “the issue of child and newborn survival is a serious concern and while Bihar has made considerable progress, we will continue to make efforts so that every child is safe.” Save the Children acknowledged the significant efforts both by the national and state governments in prioritising maternal and child health to achieve path-breaking reductions in the India’s child mortality levels. “If we want to achieve MDG 4 by 2015, we have to focus on ensuring survival on the first day of birth,” Thomas Chandy, CEO of Save the Children stated, and added:  “Our “Ending Newborn Deaths’ report released in February this year revealed the true scale of the newborn crisis.   Without targeted action now, progress made in cutting child mortality will stall. Unless the situation of child survival improves in Bihar, India won’t be able to achieve the MDG.” Bihar is now on the wings of change, having achieved one of the highest GDP growth rates in recent years. With ‘Manav Vikas Mission’ the state has created a model proving that social and economic development can and must steer together. In its mission to ensure ‘health for all’ Bihar launched a new campaign ‘Dus ka Dum, Swashthya Rahenge Hum’ – a 10 point agenda to improve the health care system in the state and to promote healthy practices among the people of Bihar. Bihar has made commendable progress in reducing newborn mortality in the state achieving a dramatic reduction to 28 per 1000 live births better than the national average of 29. In the panel discussion titled ‘Getting to Zero: Breaking the Last Frontier – Ending Newborn Deaths’, experts from Save the Children, government and civil society including Dr. Vandana Prasad (Former Member, National Commission for Protection of Child Rights), Dr. T Sundararaman (Former Director, National Health Systems Resources Center), Dr. Prof. Rajiv Ranjan Prasad (President, Indian Medical Association – Bihar Chapter) and Dr. Isha Bhagwat (Save the Children’s National Manager – Health) shared perspectives on newborn survival, challenges and road map. Save the Children believes that with 14 lakh under five deaths every year, India is facing a silent emergency that the nation, states and civil society must wake up to.   With less than 600 days left to the MDG targets there is a need to bring a sense of urgency and trigger real action to address the issue of child health in the state. “Save the Children works closely with the government to support its initiatives,” said Rafay Hussain, Save the Children’s State Program Manager, “and that is why these deliberations with the political leadership are so important. He summed up, “The need of the hour is to work together with a common purpose to build an unstoppable momentum for lasting change for our children.” Save the Children recommends:

  1. 1. Every mother and every newborn must have access to free, effective health care that will save their lives through a continuum of care approach
  2. 2. Inequity that persists among different social groups and across varying geographical divides must be tackled so that every mother and child gets requisite care.

Clearly, newborn survival must be a central element of the state’s agenda for improving maternal and child health to ensure that every child survives. It will be important for the government, NGOs and communities to come together to rapidly implement initiatives that reach out to the minorities and the most deprived sections of society. —————————————————————————————————————————– बिहार के मुख्यमंत्री ने सेव द चिल्ड्रेन के साथ नवजात शिशुओं को लम्बी ज़िंदगी जीने के प्रयास की शुरूआत के लिए एक राजनीतिक सम्मेलन का नेतृत्व किया। 20 जुलाई को पटना में सेव द चिल्ड्रेन ने एक राजनीतिक सम्मेलन का आयोजन किया जिसका लक्ष्य था  ‘जीने का हक-हर बच्चा स्वस्थ’. इस सम्मेलन में बिहार के जाने माने राजनेता और निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल हुए। इस आयोजन में राज्य के माननीय मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी मुख्य अतिथि के रूप में और माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री रामधानी सिंह विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके साथ साथ विभिन्न राजनीतिक दलों से सांसद, विधायक और एमएलसी भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने राज्य में बालजीवन में सुधार करने के प्रयास में नवजात शिशुओं की मौत से निपटने के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्यमॆंत्री ने कहा  की राज्य ने बाल उत्तरजीविता से सम्बंधित कई कार्यक्रमों की शुरुआत की हैं , साथ ही उन्होंने कहा की हमें बालिका मृत्यु एवं भूर्ण हत्या जैसे मुद्दों पर और अधिक ध्यान देने की जरुरत हैं।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सभी प्रतिभागियों ने बाल उत्तरजीवता के मुद्दे के प्रति समपर्ण का संकल्प लिया। स्वास्थ्य मंत्री श्री रामधानी सिंह की बाल एवं शिशु उत्तरजीविता बहुत  जरूरी मुद्दा हैं , जिस पर बिहार ने काफी प्रगति की है , पर हमें और बहुत कुछ करना ताकि हर बच्चा स्वस्थ्य रहें। जन प्रतिनिधियों में श्री अश्वनी कुमार चौबे, श्री राम कृपाल यादव, श्री नवल किशोर , प्रेम रंजन एवं अजय यादव प्रमुख थे। इन बाल मृत्यु दर को नियंत्रित करने उपायों पर सक्रिय रूप से चर्चा की और हर व्यक्ति ने राज्य में प्रत्येक नवजात शिशु को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के प्रयासों के लिए कदम उठाने की शपथ ली। भारत में मातृ एंव शिशु के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और बाल मृत्यु दर के स्तर में कमी करने के लिए सेव द चिल्ड्रेन केंद्र और राज्य सरकार की सराहना की। “ अगर हमें साल 2015 तक सहस्राब्दि विकास लक्ष्य- 4 (एमडीजी-4) को हासिल करना है तो हमें जन्म के पहले दिन से ही उसके स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना होगा। सेव द चिल्ड्रेन के सीईओ थॉमस चांडी ने कहा कि, ‘इस साल फरवरी में हमारी जारी रिपोर्ट ‘नवजात शिशुओं की असामयिक मृत्यु पर काबू’ में शिशुओं की मृत्यु से संबंधित कई तथ्यों का खुलासा हुआ। अब लक्षित कार्रवाई के बिना बाल मृत्यु दर में कटौती संभव नहीं होगी। जब तक बिहार में बाल जीवन की स्थिति में सुधार नहीं होगा भारत सहस्राब्दि विकास लक्ष्य- 4 (एमडीजी-4) को हासिल नहीं कर सकेगा।‘ बिहार में अब परिवर्तन का दौर है । हाल ही के सालों में राज्य ने उच्चतम जीडीपी विकास दर हासिल की है। ‘मानव विकास मिशन’ के साथ राज्य ने एक मॉडल बनाया जो साबित करता है कि सामाजिक और आर्थिक विकास साथ साथ होना चाहिए। सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बिहार ने नये अभियान ‘दस का दम स्वस्थ रहेंगे हम’ का आयोजन किया। यह 10 सूत्री एजेंडा है जिसका उद्देश्य राज्य में स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में सुधार और बिहार के लोगों के बीच स्वस्थ व्यवहार को बढ़ावा देना है। बिहार ने नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने में सराहनीय प्रगति की है। राज्य में राष्ट्रीय औसत के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया राष्ट्र में जहां एक हजार बच्चों में 29 बच्चों की मौत हो जाती है तो वहीं बिहार में ये औसत 28 का है। चर्चा में सेव द चिल्ड्रेन के विशेषज्ञ, सरकार और समाज के कई विशेषज्ञ शामिल हुए जिसका शीर्षक, था ‘शून्य करने के लिए – अंतिम सीमा तोड़कर – नवजात मृत्यु दर को पूरी तरह रोकना’ था। इस चर्चा में डॉ वंदना प्रसाद (पूर्व सदस्य, राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा आयोग), डॉ. टी सुंदररमन (पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र), डॉ प्रो राजीव रंजन प्रसाद (अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन – बिहार शाखा) और डॉ ईशा भागवत (सेव द चिल्ड्रेन की राष्ट्रीय प्रबंधक- स्वास्थ्य) ने हिस्सा लिया और नवजात शिशुओं को बचाने, चुनौतियों और रोड मैप पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। सेव द चिल्ड्रेन के राज्य कार्य प्रबंधक राफे एजाज़ हुसैन ने कहा कि सेव द चिल्ड्रेन का मानना है कि भारत में हर साल 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु हो जाती है। राष्ट्र एक मूक आपात स्थिति से गुजर रहा है  जिससे राष्ट्र, राज्यों और नागरिक सामाज को निपटना होगा। सहस्राब्दि विकास लक्ष्य- 4 (एमडीजी-4) की तय सीमा में 600 से भी कम दिनों का समय बचा है जिसके लिए राज्य में बाल स्वास्थ्य के मुद्दे के समाधान के लिए, वास्तविक कार्रवाई तात्कालिकता की भावना से करने की जरूरत है। “सेव द चिल्ड्रेन इस दिशा में सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। इसीलिए राजनीतिक नेतृत्व के साथ ये विचार विमर्श बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि, ‘समय की मांग है कि हम बच्चों के भविष्य में स्थाई बदलाव लाने के लिए साथ मिलकर काम करें।‘ सेव द चिल्ड्रेन की सिफारिशें- 1- हर मां और नवजात शिशु को मुफ्त और प्रभावी स्वास्थ्य सुविधाएं मिले और उनके जीवन को बचाया जा सके। 2- विभिन्न सामाजिक समूहों और भौगोलिक विभाजन के बीच फैली असमानता को दूर किया जाना चाहिए जिससे हर माँ और बच्चे की अपेक्षित देखभाल हो सके। जाहिर है, नवजात शिशुओं का जीवन और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, राज्य के एजेंडे का केंद्रीय तत्व होना चाहिए जिससे कि हर बच्चे को बचाया जा सके। अल्पसंख्यकों और समाज के सबसे वंचित वर्गों तक पहुंचने और इस पहल को तेजी से लागू करने के लिए. ये सरकार, एनजीओ और समाज के विभिन्न वर्गों के लिए जरूरी होगा कि वो एक साथ आएं। सेव द चिल्ड्रेन भारत का एक स्वतंत्र बाल अधिकार संगठन है। भारत में हम प्रत्येक बच्चे को खुशहाल और स्वस्थ बचपन सुनिश्चित कराने के लिए 16 राज्यों में सक्रिय हैं। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करेः विपिन कुमार, एसीसी समन्वयक, सेव द चिल्ड्रेन मोबाइल नंबरः +91 9771 49 7965 Email: b.kumar@savethechildren.in