Save the Children & BVHAs Awareness drive during the World Breastfeeding Week reached about five thousand people

Throughout the week 20 showcasing of thematic street play was organized at hospitals & public places

Save the Children and Bihar Voluntary Health Association (BVHA), between 1- 7 August, jointly organized twenty showcasing of thematic street play at different locations of Patna on the issue of breastfeeding for mass awareness. World Breastfeeding Week (WBW) is being celebrated every 1-7 August to commemorate the Innocenti Declaration. WBW was first celebrated in 1992. Now it is endorsed by various international bodies, governments and civil society organizations. Primarily World Breastfeeding Week remains to be a global annual event to promote practice of exclusive breastfeeding for the first six months of life.

In this regard, these twenty street plays were showcased at Govt. Hospitals- PMCH, Tripolia Hospital, NMCH, Mahavir Vaatsalya Hospital, New Gardiner Hospital. Also at different public locations of Patna, these plays were held including- Kargil Chowk, Gandhi Maidan, Bus Stand – Mithapur, Eco Park, Patliputra Golamber, Mauyra Lok, Karbighya Railway Station, Rajendra nagar railway station, near Biscoman Bhawan and Nehru Nagar. With a rough estimate more than five thousand people including pregnant women, lactating mothers, couples, doctors, para medical staffs, nurses and youths witnessed these twenty plays organized in seven day period.

World Breastfeeding Week patna

Today the awareness drive concluded with a press meet, where special screening of street play was also organized for media personnel. Dr. S.P. Srivastava, Former HoD, Department of Pediatrics- PMCH on this occasion shared that packed and bottle milk is like poison for children and there cannot be any other substitute for mother’s milk. He stressed that there is urgent need to strictly implement provisions of IMS Act 1992 [The Infant Milk Substitutes, Feeding Bottles and Infant Foods (Regulation of Production, Supply and Distribution) Act, 1992] to promote breastfeeding practice. Bipin Kumar from Save the Children shared details of awareness drive and highlighted in Bihar, as per NFHS 3 data, only 27.9% infants are exclusively breastfed whereas at national level it is 46.3%. Similarly, NFHS 3 shows in Bihar only 4% newborns are breastfed within one hour from birth, at national level 23.4% children given mother’s milk in first hour. Khurshid Ekram Ansari, Senior Programme Officer Projects, BVHA opined in Bihar through exclusive breastfeeding for six months and continued breastfeeding for the period of two years, we can certainly bring down infant mortality rate and ensure better future of children. Vivekanand Ojha, BVHA played important role in management of whole program.

The week long drive obtained valuable support from Govt. hospitals, particularly from, Shri A. K. Jaiswal, HoD, Department of Pediatrics, PMCH; Dr. S. S. Jha, Director, Mahavir Vaatsalya Hospital; Sister Celestine, Administrator, Tripolia Hospital, Dr. Alka Sinha, HoD, Department of Pediatrics, NMCH and Dr. Manoj Kumar Sinha, Superintendent, New Gardiner Hospital.

Aapasdari Kala Manch from Maner played most important part in this whole drive as the street play was prepared and showcased by the group. Its artists included- Ramnath Ram, Md. Nassimuddin, Mintu Baba, Usha Bharti, Vakil Ram, Ajit Kumar, Asha Pandey and Srinath Prasad.

These street plays, full of local songs, magic shows and humour at one hand entertained the audiences with its wits and comedy, at the same time managed to spread important messages on issues like breastfeeding and how crucial it is for the long term wellbeing of any child. The play were focused on the issue of breastfeeding with messages on exclusive breastfeeding, importance of Colostrum; practice of supplementary food after six months only; importance of breastfeeding for child survival and development.

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सेव द चिल्ड्रन और बिहार वोलंटरी हेल्थ एसोसिएशन दवारा ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ के उपलक्ष्य में साप्ताहिक जनजागरूकता अभियान का करीब पांच हज़ार लोगो तक पहुँच
सप्ताह भर में स्तनपान पर विषयगत नुक्कड़ नाटक का बीस बार सरकारी अस्पतालों एवं सार्वजनिक स्थलो पर मंचन

सेव द चिल्ड्रन एवं बिहार वोलंटरी हेल्थ एसोसिएशन (बी. वी. एच. ए.) के दवारा स्तनपान के मुद्दे पर पटना में 1 से 7 अगस्त के बीच स्तनपान की महत्ता के विषय पर जन जागरूकता हेतु विषयगत नुक्कड़ नाटक का बीस बार शहर के अलग-अलग जगहों पर मंचन किया गया। ज्ञातव्य हैं की, 1- 7 अगस्त को पूरी दुनिया में ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ के रूप में मनाया जाता हैं। मुख्य रूप से दुनिया भर में ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ जीवन के पहले छह महीनों के लिए विशेष रूप से स्तनपान की प्रथा को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक वार्षिक आयोजन है।

इसी क्रम में, इन बीस नुक्कड़ नाटकों का आयोजन सरकारी अस्पतालों – पी. एम. सी. एच., त्रिपोलिया अस्पताल, एन. एम. सी. एच., महावीर वात्सलय अस्पताल और न्यू गार्डिनर अस्पताल में किया गया। साथ ही, पटना के सार्वजनिक स्थानों जैसे की गांधी मैदान, बस स्टैंड -मीठापुर, इको पार्क, पाटलिपुत्र गोलम्बर, पटना (करबीघइया) रेलवे स्टेशन और राजेंद्र नगर रेलवे स्टेशन के प्रांगण और बिस्कोमान भवन के पास भी नाटक की प्रस्तुति की गई। इन बीस नुक्कड़ नाटक प्रस्तुतियो को करीब पाँच हज़ार से भी अधिक लोगो देखा, जिसमे- गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, दम्पति, युवाओं, डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और जन समुदाय शामिल थे।

साप्ताहिक जागरूकता अभियान के समापन पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। जिसमें मीडिया कर्मियों के लिए नुक्कड़ नाटक का विशेष मंचन किया गया। इस प्रेस वार्ता में डॉक्टर एस पी श्रीवास्तव, पूर्व विभागाध्यक्ष, शिशु रोग विभाग, पी. एम. सी. एच ने बतलाया की बोतल का दूध बच्चे के लिए जहर समान हैं और माँ के दूध का कोई विकल्प नहीं हो सकता हैं। उन्होंने ज़ोर देते हुए बोला की आई. ऍम. अस. 1992 के कानून को सख़्ती से लागू करने की आवश्यकता हैं। सेव द चिल्ड्रन के बिपिन कुमार ने अभियान की जानकारियो के अलावा ये भी बतलाया की एन. अफ. एच. एस. (NFHS 3) तीन के आकड़ों के अनुसार बिहार में पाँच महीनो तक सिर्फ 27.9% बच्चों को सिर्फ स्तनपान कराया जाता हैं, राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 46.3 % का हैं। इसी प्रकार, जन्म के बाद एक घंटे के अंदर सिर्फ 4% नवजात बच्चों को बिहार में स्तनपान कराया जाता हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर 23.4% को। इस मौके पर, खुर्शीद एकरम अंसारी, बी. वी. एच. ए. ने कहा की निश्चित तौर बिहार मेँ शिशु मृत्यु दर में कमी लाने एवं बच्चों के उज्जवल भविष्य निर्माण में सही अवधी तक स्तनपान की महत्वपूर्ण भूमिका हैं।

इस पूरे अभियान के संचालन में सरकारी अस्पतालों के प्रशासन का सहयोग रहा, विशेषकर श्री ए. के. जायसवाल, विभागाध्यक्ष, शिशु रोग विभाग, पी. एम. सी. एच.; त्रिपोलिया अस्पताल की सिस्टर सेलेस्टीन; डॉक्टर एस एस झा, डायरेक्टर, महावीर वात्सलय; डॉक्टर अलका सिन्हा, विभागाध्यक्ष, शिशु रोग विभाग, एन. एम. सी. एच. और डॉक्टर मनोज कुमार सिन्हा, सुपरिटेंडेंट, न्यू गार्डिनर अस्पताल का बहुमूल्य सहयोग रहा।

इस पूरे कार्यक्रम में सबसे महत्पूर्ण भूमिका आपसदारी कला मंच, मनेर की रही जिन्होंने इस नुक्कड़ नाटक को तैयार और मंचन किया। इस मण्डली के मुख्य कलाकार हैं- रामनाथ राम, मोहम्मद नसीमुद्दीन, मिंटू बाबा, उषा भारती, वकील राम, अजित कुमार, आशा पाण्डेय एवं श्रीनाथ प्रसाद। विवेकानंद ओझा, बी. वी. एच. ए. ने पूरे कार्यक्रम के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लोक गीतों, जादू के खेलो और हँसी – मजाक से भरपूर इन नुक्कड़ नाटकों दवारा एक तरफ तो देखने वाले का मनोरंजन हुआ, साथ ही उन तक स्तनपान जैसे मुद्दे से जुड़ी तमाम जानकारियाँ सहज तरीके से पहुचाने का प्रयास भी किया गया। नाटक विशेष रूप से छह माह तक सिर्फ स्तनपान, कोलोस्ट्रम के महत्व, छह महीने के बाद अनुपूरक आहार का अभ्यास; बच्चे के अस्तित्व और विकास के लिए स्तनपान के महत्व जैसे मुद्दों पर केन्द्रित रहा।